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सेंसेक्स : गिरावट के साथ सप्ताह का अंत; विशाल सिक्का का इंफोसिस के एमडी पद से इस्तीफा देने का असर



देश की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी  इंफोसिस लि. के एमडी और सीईओ पद से विशाल सिक्का के इस्तीफा देने के बाद कंपनी के शेयर की कीमत में गिरावट देखने को मिली। यही रुझान दूसरी कंपनियों के शेयरों पर दिखायी दिया और उन बिकवाली का भारी दबाव रहा।

बीएसई सेंसेक्स 271 अंकों और  एनएसई निफ्टी 67 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ। इस बीच एसएंडपी मिड कैप इंडेक्स और एसएंडपी स्माल कैप इंडेक्स क्रमशः 0.1% और 0.5% की गिरावट के साथ बंद हुआ।
इसी क्रम में सेक्टरवाइज गिरावट भी दर्ज किया गया। आइटी इंडेक्स 3.5%, हेल्थकेयर 1.6% और रियल्टी 1% की गिरावट के साथ बंद हुआ।

केवल तेल और गैस, कंज्यूमर ड्युरेबल और एफएमसीजी शेयरों की कीमत में ही तेजी के दर्शन हुए।
इंफोसिस ( - 9.6%), सन फार्मा (-3.8%) और एनटीपीसी (-2%) के शेयर सबसे अधिक नुकसान में रहे।

एशियाई शेयर बाजार में मिला-जुला रूप दिखायी दिया। निक्केई-225 1.18%, हैंग सेंग 1.08% की गिरावट के साथ बंद हुआ। लेकिन शंघाई कंपोजिट में किसी तरह का परिवर्तन नहीं दिखायी दिया।
यूरोपीय शेयर बाजार में आज नीचे का रुझान रहा।

दोपहर के बाद के सत्र में भारतीय रुपया अमेरिकी डालर के मुकाबले 64.10 डालर पर कारोबार कर रहा था।
तेल 47.39 डालर पर कारोबार कर रहा था।

आइटी सेक्टर में स्ट्राइड्स शसून और लूपिन सबसे अधिक नुकसान में रहे। ऐसे समय में, जबकि निवेशक इंफोसिस द्वारा प्रस्तावित 130 अरब रुपये के बाइबैक कार्यक्रम की नियम व शर्तों का ब्यौरा जानने का इंतजार कर रहे थे, कंपनी के एमडी और सीईओ विशाल सिक्का ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

हालाँकि, खबरों के अनुसार, वे इंफोसिस के वाइस चेयरमैन बनें रहेंगे।

घटनाक्रम ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीईएस) में खलबली मचा दी और सेंसेक्स 11% की गिरावट के साथ 904 अंकों पर आ गया। समाचारों में कहा जा रहा है कि कंपनी बोर्ड के जबर्दस्त समर्थन के बावजूद नारायण मूर्ति के लगातार हमलों से नाराज होकर सीईओ विशाल सिक्का ने इस्तीफा दिया है। इसी बीच चीफ ऑपरेटिंग आफीसर (सीओओ) यूबी राव अंतरिम सीईओ और एमडी के रूप में काम करते रहेंगे।

इस अवधि में सिक्का रणनीतिक रिलेशनसिप पर ध्यान केंद्रित करेंगे, जिससे कि टेक्नालॉजी डेवलपमेंट का काम इंफोसिस में चलता रहे।

भारतीय इस्टेट बैंक अगले एक साल में दो ग्रामीण बैंकों के लिए आइपीओ लाने की तैयारी कर रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक में ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है। कार्यकुशलता सुधारने और मूल्यवत्ता पैदा करने के लिए आंध्र प्रदेश ग्रामीण विकास बैंक और सौराष्ट्र बैंक नामक ग्रामीण क्षेत्रीय बैंक आइपीओ लायेंगे।

एक अन्य घटनाक्रम में पीएनबी और एचडीएफसी बैंक ने 50 लाख रुपये तक की जमाओं वाले बचत बैंक खातों  पर ब्याज दर 50 बेसिस पॉइंट की कटौती कर 3.5% कर दिया।

सभी प्रमुख बैंकों ने बचत जमाओं पर ब्याज दरों में कटौती की है।

वित्तीय वर्ष 2017 में बैंक क्रेडिट ग्रोथ 4.4% पर आ गया। इसके परिणामस्वरूप बैंकों की आय के प्रमुख स्रोत नेट इंटरेस्ट इनकम में कमी आ गयी है।

शुद्ध ब्याज से होनेवाली आय, धन और जमा की लागत के रूप में किए गए ब्याज व्यय के समायोजन के बाद अर्जित ब्याज आय है। बैंक की कुल परिचालन आय में शुद्ध ब्याज आय का हिस्सा वित्त वर्ष 2013 में 72% से घटकर वित्त वर्ष 17 में 64% हो गया।

रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, 2011 से पहली बार जुलाई 2017 में वृद्धिशील क्रेडिट-जमा अनुपात 100 से पार कर गया। इसी समय, वृद्धिशील निवेश-जमा अनुपात लगातार गिरावट पर रहा है। इससे पता चलता है कि नोटबंदी के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा जमा हुई भारी जमा स्थिर हो रही है, उधार धीरे-धीरे लोकप्रियता प्राप्त कर रहा है।

इसी कारण से, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने बचत दर को कम कर दिया है; क्योंकि वे ऋण देने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। यहां तक कि छोटे बैंकों से भी इसी तरह  की उम्मीद है। यह कॉर्पोरेट ऋण में दर में कटौती के लिए रास्ता तैयार करता है ताकि क्रेडिट की मांग को बढ़ावा दिया जा सके और बैंकों के लिए ब्याज आय बढ़ सके।

This article was originally published in English at www.equitymaster.com

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