भारतीय शेयर बाजारों ने दोपहर के सत्र में सपाट कारोबार किया। लेकिन अपराह्न में वापसी की और आखिरी घंटे की ट्रेडिंग में थोड़ी बढ़त के साथ बंद हुए।
बीएसई सेंसेक्स 88 अंकों की बढ़त के साथ और एनएसई निफ्टी 53 अंकों
की बढ़त के साथ बंद हुआ। एस&पी बीएसई मिड कैप 0.7% जबकि एस&पी बीएसई स्मालकैप ने 0.1% की वृद्धि के साथ कारोबार संपन्न किया। कंज्यूमर ड्युरेबल, इनर्जी और मेटल शेयरों ने
मुख्य रूप से जहाँ बढ़त प्राप्त की, वहीं फार्मा शेयरों की कीमत
में गिरावट दर्ज हुई।
बायोकान शेयर की कीमत में 4.9% की गिरावट आयी। निफ्टी फार्मा इंडेक्स में शामिल लगभग सभी कंपनियों के शेयरों की कीमत में
लगातार तीसरे सत्र में गिरावट दर्ज की गयी। सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज के शेयर
कीमत में 1.6% की गिरावट रही, जबकि डॉ. रेड्डी’ज लेबोरेटरीज लि.
के शेयर 3.8% नीचे रहे।
यहाँ पर मिला-जुला कारोबार हुआ। हैंग सेंग ने 1.2% की बढ़त हासिल की। वहीं निक्केई-225 और शंघाई कंपोजिट क्रमश: 0.38% और 0.33% नीचे गिरकर बंद हुए।
यहाँ भी
मिला-जुला प्रदर्शन रहा। डैक्स 0.23% और एफटीएसई-100
0.09% की ऊँचाई के साथ बंद हुआ। वहीं सीएसी-40 में 0.01% की गिरावट
रही।
दोपहर के
सत्र में भारतीय रुपया, प्रति अमेरिकी डालर के मुकाबले में 63.71 रुपये पर
कारोबार कर रहा था। रिपोर्ट लिखे
जाते समय तेल 48.7 अमेरिकी डालर पर ट्रेडिंग कर रहा था।
अर्थ-व्यवस्था
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दर में 25 बेसिस
पॉइंट की कटौती करने के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि पहले की 14-15% की उधारी-दर (लेंडिंग रेट ) अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत को प्रतिस्पर्द्धा
से बाहर कर रहा था। इंडस्ट्री में भी इतनी ऊँची दर पर निवेश कर पाना संभव नहीं था। उन्होंने कहा
कि ऐसे समय में जब मुद्रा-स्फीति 10% की ऊँचाई पर थी, बैंक जमा दर 9% की ऊँचाई पर थी। बैंक 14-15% ब्याज पर कर्ज दे रहे थे। इतनी ऊँची दर पर अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक निवेश हो पाना
संभव नहीं है।
जेटली ने आगे
कहा कि ब्याज दरों में ‘धीरे-धीरे’ गिरावट आयेगी और ये ‘सम्मानजनक’ होंगे। सरकार ने निवेशकों को एक स्थिर दर पर कर्ज मुहैया कराने के लिए कदम
उठाये हैं। इससे वे चिट-फंड कंपनियों की तरफ आकर्षित नहीं होंगें, जो
कि बैंकों की तुलना में मात्र 1-1.5% की अधिक
ब्याज दर देते हैं।
जेटली ने
सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक के 1 करोड़ रुपये से नीचे के बचत खाते पर ब्याज
दर में कटौती का बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह उधारी दर में कटौती के अनुरूप है। उपर्युक्त
चार्ट में भारत की मुद्रा-स्फीति और नीति-दर के समकक्ष अन्य एशियाई
अर्थ-व्यवस्थाओं को दर्शाया गया है। हालाँकि केंद्रीय बैंक ने अपनी मुद्रा-नीति
संबंधी वक्तव्य में भविष्य में मुद्रा-स्फीति के शीघ्र ही फिर बढ़ने का अंदेशा
जताया है।
जून में रिजर्व बैंक ने अपने
मौद्रिक-वक्तव्य में 2018 के वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में औसत
तिमाही मुद्रा-स्फीति 2-3.5%
और दूसरी छमाही में 3.5-4.5% का अनुमान लगाया
था। अब यह उम्मीद करता है कि साल के अंत तक मुद्रास्फीति लगभग 4% होगी। जब तक मुद्रास्फीति इस ट्रैक का अनुसरण करती है, तब तक इस वित्तीय वर्ष में दर में कटौती की संभावनाएं क्षिण रहेंगी।
इंडियन ऑयल कार्पोरेशन ने पहली तिमाही
में अपने लाभ में 45% गिरावट आने की खबर दी है। एक साल पहले की 82.69 अरब रुपये की तुलना में कंपनी
ने 45.49 अरब रुपये के शुद्ध लाभ की घोषणा की है। एक साल पहले
की तिमाही के 1.07 खरब रुपये के राजस्व की तुलना में वित्तीय-वर्ष 2017-18 में जून को समाप्त तिमाही में कंपना का राजस्व 1.29 खरब
रुपये रहा।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अफरात की आपूर्ति के चलते कंपनी ने अमेरिका से
कच्चे तेल की खरीदी बढ़ाने जा रही है। भारत पेट्रोलियन कार्पोरेशन लि.( बीपीसीएल)
ने भी अपनी कोच्चि रिफाइनरी के लिए 10 लाख बैरल कच्चा तेल अमेरिका से खरीदा है।
आइओसी के शेयर की
कीमत में 8% की तेज
वृद्धि दर्ज हुई है। इस बीच
बीपीसीएल ने मुख्य रूप से गैस कारोबार के साथ अपने कारोबार का विस्तार करने की
घोषणा की है। इसके लिए कंपनी ने मार्केटिंग और रिफाइनिंग समेत अपनी सभी विस्तार
योजनाओं पर एक खरब रुपये की पूँजी खर्च करने का
लक्ष्य निर्धारित किया है।
बीपीसीएल के शेयर बीएसई में 5.9% की बढ़त के
साथ बंद हुए।
टाइटन लि. के शेयर 9.3% की वृद्धि के
साथ बंद हुए। ऐसा इसलिए हुआ कि कंपनी ने पहली तिमाही में लगभग दोगुने शुद्ध लाभ की घोषणा की। 30 जून को समाप्त तिमाही में
कंपनी ने 2.37 अरब रुपये का शुद्ध लाभ कमाया, जबकि एक साल पहले 1.20 अरब रुपये की
शुद्ध कमाई की थी।
This article was originally published in English at www.equitymaster.com
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