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भारतीय शेयर बाजारों पर अंतरराष्ट्रीय अंकुश; स्टेट बैंक के शेयर 5.3% गिरे


अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच जारी तनाव का अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों पर असर कायम है। इसकी चपेट में भारतीय शेयर बाजार  भी आये हैं। इस तरह विगत छह सप्ताहों में ऐसा पहली बार हुआ, जब पूरे सप्ताह भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गयी है।

बीएसई सेंसेक्स 318 अंकों और एनएसई निफ्टी 109 अंकों के साथ बंद हुआ।
एसएंडपी बीएसई मिड कैप में 0.2% और एसएंडपी बीएसई स्माल कैप में 0.1 % की गिरावट दर्ज की गयी।
मेटल, ऑटो, और पीएसयू शेयरों में मुख्य रूप से गिरावट देखी गयी। दूसरी तरफ फार्मा और कंज्यूमर ड्युरेबल शेयर तेजी के साथ बंद हुए।

एशियाई शेयर बाजार में कुल मिलाकर गिरावट रही। हांग कांग का शेयर मार्केट इसमें आगे रहा। हैंग सेंग में 2.04% और शंघाई कंपोजिट में 1.63% की गिरावट रही। दूसरी तरफ जापान का निक्केई-225 1.16% की गिरावट के साथ बंद हुआ।

यूरोपीय शेयर बाजारों की हालत भी ठीक नहीं रही और गिरावट के साथ बंद हुए। इस मामले में फ्रांस का शेयर मार्केट सबसे आगे रहा। सीएसी-40 1.16%, एफटीएसई-100 (लंदन) 1.12% और डीएएक्स ( जर्मनी) 0.41% के साथ बंद हुआ।

रुपया-डालर

दोपहर के बाद के सत्र में रुपया, डालर के मुकाबल में 64.15 रुपये/डालर के साथ ट्रेडिंग कर रहा था।
लिखने के समय तेल की कीमत 48.31 डालर थी।

आर्थिक समाचार

भारतीय रिजर्व बैंक ने 30 जून,2017 को समाप्त तिमाही में सरकार को मात्र 306.59 अरब रुपये का लाभांश देने की घोषणा कर चौंका दिया। यह पिछले साल के 658.76 अरब रुपये के आधे से भी कम है। केंद्रीय बैंक ने इसकी कोई खास वजह नहीं बतायी है।


सरकार ने हालाँकि 2017-18 में लाभांश के रूप में 580 अरब रुपये पाने की आशा की थी।
वर्ष 2017-18 के केंद्रीय बजट में सरकार ने रिजर्व बैंक, राष्ट्रीयकृत बैंकों और वित्तीय संस्थानों से 749.01 अरब रुपये प्राप्त होने का हिसाब-किताब लगाया था। अब सरकार के वित्तीय गणित पर दबाव बढ़ गया है और इसे चालू वित्तीय वर्ष ( 2017-18) में 3.2% के वित्तीय घाटे का लक्ष्य हासिल करने के लिए दूसरे स्रोतों की तलाश करनी पड़ेगी।


ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों ने आज की ट्रेडिंग में डुबकी लगा दी।

टाटा मोटर्स और आइसर मोटर्स के शेयरों को सबसे अधिक नुकसान हुआ।
अशोक लेलैंड को देश की नवोन्मेषी ( इनोवेटिव) और तेजी से उन्नति कर रही लॉजिस्टिक्स कंपनी रिविगो से एक बड़ा ( पूरी तरह निर्मित 500 वाहनों का) आर्डर हाथ लगा है। 
फिर भी, अशोक लेलैंड के शेयरों ने 0.7% का गोता लगाया।


इसी बीच घरेलू यात्री वाहन की बिक्री जुलाई में 15.12% की वृद्धि के साथ 2,98,997 पर पहुँच गयी। पिछले साल इसी माह में 2,59,720 वाहनों की बिक्री हुई थी।


घरेलू बाजार में कार की बिक्री 8.5% की वृद्धि के साथ पिछली जुलाई की 1,77,639 की तुलना में 1,92,773 इकाइयों की रही। सोसाइटी आफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स ( एसआइएएम) द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार जुलाई में कुल दोपहिया वाहनों की बिक्री 13.73% की बढ़ोतरी के साथ 16,79,055 इकाइयों की रही, जबकि पिछले साल इसी जुलाई माह में 14,76,332 इकाइयों की रही थी।


सेक्टर के अनुसार देखा जाये तो, वैश्विक वित्तीय संकट के बाद से एसएंडपी बीएसई ऑटो इंडेक्स सबसे अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। नवंबर 2008 के बाद से ऑटो सूचकांक में 823% की बढ़ोतरी हुई है। समान अवधि में बेंचमार्क इंडेक्स रिटर्न 230% के मुकाबले कहीं आगे है।

इसकी प्रमुख वजह उपभोक्ता बाजार का निरंतर विस्तार, बढ़ती मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं ने दुनिया के दूसरे सबसे अधिक आबादी वाले देश में कारों की बिक्री बढ़ा दी है। इसके अलावा, सौम्य ब्याज दरों और निम्न तेल की कीमतों ने भी इस खपत में तेजी में मदद की है।

इतना ही नहीं, ऑटो सेक्टर में वैल्यू-माइग्रेशन काफी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। पहली बार कार खरीदार आम तौर पर आल्टो और वैगनआर जैसे एंट्री लेवल की कारों में दिलचस्पी लेते हैं, लेकिन अब स्विफ्ट और डिजायर जैसी महँगी कारों में रुचि ले रहे हैं।
  
 पांच साल पहले, पहली बार खरीदारी करने वालों में तीन में से एक (33%) ने इन महंगे मॉडल की कारों को खरीदा अब, हर दो में से एक (50%) इनकी खरीदारी कर रहा है।

बैंकिंग सेंक्टर

भारतीय स्टेट बैंक के शेयर आज 5.4% की गिरावट के साथ बंद हुए।
यूनियन बैंक आफ इंडिया के शेयर भी 5.3% की गिरावट के साथ बंद हुए। खराब-ऋण के प्रॉविजन ज्यादा होने के कारण पहली तिमाही में शुद्ध लाभ 30% कम हुआ।
शुद्ध-लाभ एक साल पूर्व के 1.66 अरब रुपये की जगह 30 जून को समाप्त तिमाही में 1.17 अरब रुपये ही हुआ।

टाटा स्टील की शेयर कीमत में 1.4% की गिरावट रही।
आइपीओ खंड में कोच्चिन शिपयार्ड के शेयर की कीमत में इश्यू कीमत 432 रुपये में 20% की तेजी दर्ज हुई। 1-3 अगस्त के आफर पिरिएड में आइपीओ 79.19 गुना ओवरसब्स्क्राइब हुआ।

This article was originally published in English at www.equitymaster.com

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