ट्रेडिंग के आखिरी क्षणों
में भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी गयी। बीएसई
सेंसेक्स 266 और एनएसई निफ्टी
83 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ। दूसरी तरफ एसएंडपी बीएसई
मिड कैप इंडेक्स और एसएंडपी बीएसई स्माल कैप इंडेक्स क्रमशः 1.5% और 1% नीचे रहा।
बीएसई का क्षेत्रवार सूचकांक
सबसे अधिका गिरावट (2%) आइटी इंडेक्स में देखने को मिली। उसके बाद पीएसयू
शेयर 1.8% लुढ़कर बंद हुए। हेल्थकेयर के
शेयर 1.6% नीचे रहे। सबसे अधिक नुकसान इंफोसिस, भेल
और बैंक
आफ बड़ौदा के शेयरों को उठाना पड़ा। इसके विपरीत एक्सिस
बैंक, एमएंडएम
और टेक
महिंद्रा के शेयर सबसे बढ़त हासिल करनेवालों में रहे।
एशियाई शेयर बाजार
एशिया के शेयर बाजारों का
रुझान पूर्व की तरह मिला-जुला ही रहा। शंघाई कंपोजिट 0.56% की बढ़त के साथ बंद हुआ और हैंग
सेंग 0.40% की बढ़त के साथ । निक्केई-225 0.40% लुढ़का।
यूरोपीय शेयर बाजार
यहाँ के बाजार में गिरावट का दौर चला। सबसे अधिक गिरावट फ्रांस के शेयर बाजार
में देखने को मिली। सीएसी-40 0.66% नीचे रहा। जबकि डीएएक्स में 0.36% और एफटीएस-100 में 0.11% की गिरावट दर्ज हुई।
रुपया-डालर
अमेरिकी डालर के मुकाबले भारतीय
रुपया दोपहर के बाद के सत्र में 64.03/डालर पर कारोबार कर रहा था।
तेल की ट्रेडिंग 48.67 अमेरिकी डालर पर हो रही थी।
इंफोसिस के शेयर की कीमत 881 अंकों की गिरावट के साथ तीन साल के सबसे निचले
स्तर पर पहुँच गयी। इंट्रा-डे ट्रेडिंग में 4.5% की गिरावट देखने को मिली। आइटी की इस दिग्गज कंपनी की बाइबैक योजना बाजार में जोश भरने में
असमर्थ रही। फार्मा शयरों ने मिला-जुला कारोबार किया। अजंता फार्मा और पानासिया बॉयोटेक के
शेयर सर्वाधिक नुकसान में रहे।
घरेलू फार्मास्युटिकल सेक्टर में हलचल मचने के संकेत हैं। खबर है कि अहमदाबाद
की कैडिला
हेल्थकेयर और टॉरेंट
फार्मास्युटिकल्स आपसी विलय की संभावना का फिर से पता लगाने में जुट
गयी हैं। इस विलय के बाद संयुक्त कंपनी लगभग 700 अरब रुपये के बाजार में दूसरे
नंबर पर आ जायेगी और इस तरह से सन फार्मा के एकदम करीब पहुँच जायेगी। कैडिला
हेल्थकेयर पहले से ही दूसरे नंबर पर है। इसका बाजार पूँजीकरण 490.9 अरब रुपये का
है। इसके बाद सिप्ला,
लूपिन
और अरबिंदो
फार्मा का नंबर आता है।
शेयर बाजार में , 2015 में , फार्मा शेयर की तूती बोलती थी। लेकिन 2017 के
आरंभ से बीएसई फार्मा इंडेक्स में 20% की गिरावट दर्ज हो चुकी है। शीर्ष फार्मा शेयरों का कुल मार्केट
कैपिटलाइजेशन इस समय रिलायंस इंडस्ट्रीज से भी कम है।
हमारे रिसर्च एनलिस्ट
गिरीश शेट्टी की राय में सभी फार्मा शेयरों को एक ही नजरिये से नहीं देखना चाहिए।
फार्मा सेक्टर की दिग्गज कंपनियाँ वर्तमान हालात से उबरेंगी। ठीक आइटी की तरह
अच्छे फार्मा शेयर हैं।
सवाल किया जा सकता है कि
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अर्थ-व्यवस्था संबंधी खबर
देश में कोयले के उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है। इसके कारण आयातित कोयले पर भारत की निर्भरता
वित्तीय वर्ष 2016-17 में 6.4% की गिरावट के साथ 191.95% मैट्रिक टन (एमटी) पर आ गयी है।
खबर तो यह भी है कि कोल इंडिया (सीआइएल) के अधिक उत्पादन से देश में कोयले की
स्थिति सरप्लस में पहुँच गयी है।
स्मरणीय है कि चीन और अमेरिका के बाद भारत दुनिया में कोयले का तीसरा सबसे
बड़ा उत्पादक देश है। फिर भी ईंधन की माँग और आपूर्ति की समस्या का सामना कर रहा है।
This article was originally
published in English at www.equitymaster.com
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