शेयर बाजार
भारतीय शेयर बाजारों में भारी गिरावट का दौर जारी है। बीएसई सेंसेक्स में 239 अंकों की गिरावट दर्ज
की गयी। जबकि, एनएसई निफ्टी 68 अंकों की गिरावट के साथ बंद
हुआ। इस बीच, एसएंडपी बीएसई मिडकैप इंडेक्स और एस एंड पी बीएसई स्मॉल कैप इंडेक्स क्रमशः 0.5% और 1% की तेजी के साथ बंद हुआ।
बिजली कंपनियों और कंज्यूमर ड्यूरेबल के शेयरों
को छोड़कर बाकी सभी सेक्टरों के सूचकांक गिरावट
के साथ बंद हुए।
एशियाई शेयर बाजार
एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट का नजारा देखने को मिला। इस मामले में चीन के शेयर बाजार आगे रहे।
शंघाई कंपोजिट 0.37% नीचे रहा। हांगकांग का हैंग सेंग 0.28 % नीचे रहा। जापान के निक्केई-225 में 0.25% की गिरावट रही।
यूरोपीय शेयर बाजार
यूरोपीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। एफटीएसई-100 में 0.02% की तेजी रही। जबकि सीएसी-40 और डीएक्स ने गिरावट का सामना किया। ये क्रमशः 0.30% और 0.16% नीचे रहे।
रुपया और डालर
दोपहर सत्र में रुपया, यूएस डॉलर के मुकाबले 64.63 रुपये पर कारोबार कर रहा था। रिपोर्ट लिखे जाते समय तेल की कीमत 49.76 अमेरिकी डॉलर थी।
कोल इंडिया
कोल इंडिया ने 2017-18 वित्तीय वर्ष की अप्रैल-जुलाई की अवधि में 155.4
मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया। इस तरह कंपनी ने लक्ष्य से 12.6 मिलियन टन कोयले
का उत्पादन कम किया। इस खबर के आते ही कंपनी के शेयर की कीमत में 3.4% की
गिरावट आयी।
इंडियन ऑयल कार्पोरेशन
कंपनी के शेयर की कीमत में 4.6% की तेजी आयी। जबकि समीक्षाधीन तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 45 % की गिरावट के साथ 45.5 अरब रुपये रहा। समान अवधि में पिछले साल कंपनी का शुद्ध लाभ 82.7 अरब रुपये रहा था। दरअसल शेयर में तेजी की वजह यह रही कि विशेषज्ञों ने मात्र 30.6 अरब रुपये की शुद्ध लाभ का अनुमान लगाया था।
कंपनी के शेयर की कीमत में 4.6% की तेजी आयी। जबकि समीक्षाधीन तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 45 % की गिरावट के साथ 45.5 अरब रुपये रहा। समान अवधि में पिछले साल कंपनी का शुद्ध लाभ 82.7 अरब रुपये रहा था। दरअसल शेयर में तेजी की वजह यह रही कि विशेषज्ञों ने मात्र 30.6 अरब रुपये की शुद्ध लाभ का अनुमान लगाया था।
फार्मा शेय़र
फार्मा सेक्टर के शेयरों का प्रदर्शन मिला-जुला
रहा। स्ट्राइड्स शसून और लूपिन के शेयरों का प्रदर्शन
सबसे खराब रहा। लूपिन के शेयरों की कीमत में 3.8% की
गिरावट रही। क्य़ोंकि 30 जून 2017 को समाप्त तिमाही में कंपनी का कुल एकीकृत शुद्ध
लाभ 59.4% की गिरावट के साथ 3.6 अरब रुपये पर आ गया। कुछ
उत्पादों की कीमत में घटाव, अमेरिका में कमतर बिक्री और देश के अंदर जीएसटी लागू
होने के बाद अस्त-व्यस्तता के कारण हुआ। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में कंपनी ने 8.8 अरब रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था।
वित्त वर्ष-2012 की पहली तिमाही में उत्तर
अमेरिका में कंपनी की बिक्री 16 अरब रुपये पर थी, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि
में 21.9 अरब रुपये थी, जो कि वैश्विक बिक्री का 42% थी।
इसके अलावा, कंपनी की भारत के निर्माण की
बिक्री Q1 FY2018 के दौरान 9.3 अरब रुपये रही, जो ल्यूपिन की वैश्विक बिक्री का
25% है।
इस बीच ल्यूपिन को अपने Rosuvastatin कैल्शियम टैबलेट ( 5 मिग्रा, 10 मिग्रा, 20 मिग्रा और संयुक्त 40 मिग्रा के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के खाद्य एवं औषधि
प्रशासन (यूएसएफडीए) से अंतिम स्वीकृति मिल गयी है।
आईएएमएस मैट मार्च-2017 के अनुसार क्रेस्टर टैबलेट की अमेरिका
में 3.4 बिलियन अमेरिकी डालर की बिक्री
हुई।
ये टैबलेट आईपीआर फार्मास्युटिकल्स, इंक के क्रेस्टर टैबलेट के एबी रेटेड जेनेरिक समकक्ष हैं।
ये टैबलेट आईपीआर फार्मास्युटिकल्स, इंक के क्रेस्टर टैबलेट के एबी रेटेड जेनेरिक समकक्ष हैं।
हाल के दिनों में फार्मा कंपनियों पर, अपने विनिर्माण संयंत्रों में गुणवत्ता मानकों का पालन
करने के लिए अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन
(यूएसएफडीए) का भारी दबाव है।
पिछले तीन सालों के दौरान यूएसएफडीए ने कई नियामक चिंताओं को उठाया है, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय दवा कंपनियों को आयात
प्रतिबंध और नई दवा की मंजूरी के निलंबन का सामना करना पड़ा है। लेकिन 2017 में नई दवाओं के अनुमोदन में बढ़ोतरी
से इन्हें साँस लेने का मौका मिला है।
जनवरी-जुलाई 2017 की अवधि में 129 जेनेरिक दवाओं को मंजूरी मिली थी। यह पिछले साल की इसी अवधि में 89 दवाओं को मिली मंजूरी से 45% अधिक है।
हालांकि, हमारे शोध विश्लेषक ताहा मर्चेंट
के अनुसार, अनिश्चितताओं सेक्टर में स्टॉक
विशिष्ट होना महत्वपूर्ण है। ऐसे में क्षमतावान और टिकाऊ कंपनियों की तलाश करना जरूरी
हो जाता है। तो ऐसे में संभावित multibagger स्टॉक की पहचान करने का क्या
तरीका है? कैसे एक सही समय पर उन्हें चुनते
हैं और उन्हें अपनी पूरी क्षमता का फायदा उठाते हैं ? अपेक्षित दौलत हासिल करने के लिए कितने मल्टीबैगर की जरूरत होगी ?
सबसे महत्वपूर्ण बात, क्या अभी कोई स्टॉक है जो
मल्टीबैगर हो सकता है? सब कुछ जानने के लिए यहां क्लिक
करें । अर्थव्यवस्था से खबरों पर आगे बढ़ते हुए विनिर्माण क्षेत्र में संकुचन की इस
तरह की प्रवृत्ति के बाद, माल और सेवा कर
(जीएसटी) के कार्यान्वयन के पीछे भारत के सेवा क्षेत्र में गतिविधि जुलाई
के महीने सितंबर 2013 से निम्नतम स्तर तक घट गई।
निक्केई सेवा व्यवसाय गतिविधि का सूचकांक जून में 53.1 से जुलाई में 45.9 पर गिर गया। निक्केई इंडिया कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स जून में 52.7 से बढ़कर जुलाई में 46.0 पर आ गया था। रिपोर्ट ने जनवरी से उत्पादन और नये काम में पहली मंदी का संकेत भी दिया, जिसने श्रम बाजार पर प्रतिकूल असर डाला। इसी तरह, कारखाने के आर्डर जुलाई और फरवरी 200 9 के बाद तेज गति से घट गये।
निक्केई सेवा व्यवसाय गतिविधि का सूचकांक जून में 53.1 से जुलाई में 45.9 पर गिर गया। निक्केई इंडिया कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स जून में 52.7 से बढ़कर जुलाई में 46.0 पर आ गया था। रिपोर्ट ने जनवरी से उत्पादन और नये काम में पहली मंदी का संकेत भी दिया, जिसने श्रम बाजार पर प्रतिकूल असर डाला। इसी तरह, कारखाने के आर्डर जुलाई और फरवरी 200 9 के बाद तेज गति से घट गये।
This article was
originally published in English at www.equitymaster.com
Read the complete Indian stock market update. For
the terms of use, go here.
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें